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à¤à¥à¤°à¥‚ण (Embryo) पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ के विकास की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ को कहते हैं। मानव में तीन मास की गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥â€Œ à¤à¥à¤°à¥‚ण को गरà¥à¤ (fetus) की संजà¥à¤žà¤¾ दी जाती है।
à¤à¤• निषेचित अंडाणॠजब फलोपिओन नालिका (fallopian tube) से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¤¾ है तब उसका खंडीà¤à¤µà¤¨ (segmentation) होता हें तथा यह अवसà¥à¤¥à¤¾ मोरूला (morula) बन जाता हें। पà¥à¤°à¤¥à¤® तीन सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में ही पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• जननसà¥à¤¤à¤° (primary germ layers) पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• जनन सà¥à¤¤à¤° के तीन à¤à¤¾à¤— होते हैं। बाहर का à¤à¤¾à¤— बाहà¥à¤¯à¤¤à¥à¤µà¤šà¤¾ (ectoderm), अंदर का à¤à¤¾à¤— अंतसà¥à¤¤à¥à¤µà¤šà¤¾ (endoderm) और दोनों के बीच का à¤à¤¾à¤— मधà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤à¤° (mesoderm) कहलाता है। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ से विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कारà¥à¤¯ करनेवाले अंग विकसित होते हैं।
à¤à¥à¤°à¥à¤£ अवसà¥à¤¥à¤¾ अषà¥à¤Ÿà¤® सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¤¶à¥ के अंत तक रहती है। नाना आशयों तथा अंगों के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के साथ साथ à¤à¥à¤°à¥‚ण में अतà¥à¤¯à¤‚त महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ परिवरà¥à¤¤à¤¨ होते हैं। इसके पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥â€Œ तीसरे मास से गरà¥à¤ कहानेवाली अवसà¥à¤¥à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¤µ तक होती है।
à¤à¥à¤°à¥‚ण अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में अपना पोषण पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• अंडाणॠके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लाठगठपोषक दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¥‹à¤‚ से पाता है। इसके पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥â€Œ बà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की गà¥à¤°à¤‚थियों तथा वपन की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में हà¥à¤ ऊतकलयन के फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ रकà¥à¤¤ से पोषण लेता है। à¤à¥à¤°à¥‚णपटà¥à¤Ÿ (embryonic disc), उलà¥à¤µ (amnion), देहगà¥à¤¹à¤¾ (coelom) तथा पीतक (yolk) थैली में à¤à¤°à¥‡ दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯ से पोषण लेता है। अंत में अपना तथा नाà¤à¤¿ नाल के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥â€Œ माता के रकà¥à¤¤à¤ªà¤°à¤¿à¤µà¤¹à¤¨ के à¤à¥à¤°à¥‚णरकà¥à¤¤ का परिवहनसंबंध सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ होकर, à¤à¥à¤°à¥‚ण का पोषण होता है। 270 दिन तक मातृ गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में रहने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ पà¥à¤°à¤¸à¤µ होता है और शिशॠगरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ से निकलता है।
à¤à¥à¤°à¥‚ण अपने विकास के शà¥à¤°à¥‚आती चरण में, पà¥à¤°à¤¥à¤® कोशिका विà¤à¤¾à¤œà¤¨ से लेकर जनà¥à¤®, पà¥à¤°à¤¸à¤µ या अंकà¥à¤°à¤£ तक, à¤à¤• बहà¥à¤•ोशिकीय डिपà¥à¤²à¥‰à¤¯à¤¡ यूकà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿ होता है। इंसानों में, इसे निषेचन के आठसपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक (मतलब à¤à¤²à¤à¤®à¤ªà¥€ के 10वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक) à¤à¥à¤°à¥‚ण कहा जाता है और उसके बाद से à¤à¥à¤°à¥‚ण की बजाय इसे गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ शिशॠ(फेटस) कहा जता है।
à¤à¥à¤°à¥‚ण के विकास को à¤à¤‚बà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤œà¥‡à¤¨à¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ कहा जाता है। जीवों में, जो यौन पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ करते हैं, à¤à¤• बार शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ अणà¥à¤¡ कोशिका को निषेचित कर लेता है, तो परिणाम सà¥à¤µà¤°à¥‚प à¤à¤• कोशिका जनà¥à¤® लेती है, जिसे जाइगोट कहते हैं, जिसमें दोनों अà¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤•ों का आधा डीà¤à¤¨à¤ होता है। पौधों, जानवरों और कà¥à¤› पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ में समविà¤à¤¾à¤œà¤¨ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤• बहà¥à¤•ोशिकीय जीव को पैदा करने के लिठजाइगोट विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ होना शà¥à¤°à¥‚ हो जाà¤à¤—ा. इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का परिणाम ही à¤à¤• à¤à¥à¤°à¥‚ण है।
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